अबे ओ दल्ले
सांप की केंचुली में छिपे जोंक
तुम सबसे घिनौने तब नहीं होते
जब बनते हो प्रहरी
और हाथ में डेढ़ फुट का डंडा
या वर्दी पर टंके सितारों के रुआब में
तुम उसे भगाते हो थाने से
जो भेड़ियों से भागकर
घूंघट भर हिम्मत जुटाकर
मन में प्रलंयकारी प्रण करके पहुंचती है
और तुम्हारीं
लपलपाती फटी जीभ तक पहुंचे
भोग का प्रकोप
उसकी बची खुची
अस्मत-किस्मत-हिम्मत को भी
चीर देती है
अबे ओ दल्ले
खादी के पीछे के रंगे सियार
तुम सबसे अश्लील तब नहीं होते
जब दलालों के पूरे कुनबे के साथ बैठकर
मनाते हो जश्न हादसों का
चिताओं का ताप, लाशों की सढांध
तुम्हारे मुंह में पानी लाती है
और तुम तुम्हारी तोंद से ज्यादा लील जाते हो
अबे ओ दल्ले
छाती पर बैठ मूंग दलते सरकारी दामाद
तुम तब सबसे हरामखोर नहीं होते
जब जिंदा गरीब की खाल खींचते हो
उसके जी को खौलाकर तिल तिल मारते हो
लेकिन उसके माथे पर लिखे कर्ज का
सूद भर भी उसे नहीं देते
पर उसी के हाड़-मांस-पसीने पर
ठहाके लगाते हो
लाढ़ लड़ाते हो
बच्चे पढ़ाते हो
और उसकी किस्मत की फाइलों पर
कतारों के दलदल के दस्तखत करने में
तुम्हारे हाथ नहीं कांपते
अबे ओ दल्ले
तुम सबसे कमीने, सबसे कुटिल, सबसे चालबाज तब होते हो
जब हाथ में थाम लेते हो माइक
और मार देते हो लाख सपनों की पैमाइश
तुम सबसे हरामखोर, सबसे अश्लील तब होते हो
जब और दल्लों की तुम्हारी ओर उछाली चाप को
तुम हजारों घुंटी हुई सांसों का दम घोंटकर उछलकर लपकते हो
तुम सबसे अमानवीय तब होते हो
जब तुम सवाल बेचते हो
क्योंकि दल्लों के दलदल में फंसी छटपटाती जान के पास
सिर्फ सवाल होते हैं !
- देवेश वशिष्ठ 'खबरी'
14 जुलाई 2017 (नोएडा)

अच्छी जानकारी है
जवाब देंहटाएंbsbd account
Pls write same posts in English
जवाब देंहटाएंwww kannadadaily.ml
www.laddurecipi.blogspot.com
..
जवाब देंहटाएं