14/4/26

कितने ख्वाब जलाने होंगे?

जिनके घर बेगाने होंगे

उनके कौन ठिकाने होंगे?

जीते जी जब नर्क मिले तो

कितने पाप कमाने होंगे?


गैरों को सब पता है लेकिन

अपने ही अनजाने होंगे

छत तो होगी सिर के ऊपर

पर अंदर वीराने होंगे


हँसते चेहरों के पीछे भी

कितने दर्द छुपाने होंगे?

नींद अगर आँखों से रूठे

कितने ख्वाब जलाने होंगे?


खामोशी की आदत करके

अपने मन समझाने होंगे

भीड़-भाड़ में, चहल-पहल में

कितने तनहा जाने होंगे?


घर के कमरे काल कोठरी

कैसे ठौर ठिकाने होंगे?

इसी भरोसे जिंदा हूं कि

अच्छे दिन भी आने होंगे



© 
- देवेश 'खबरी'

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें