tag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post7094860376479225641..comments2007-06-07T19:18:25.957+05:30Comments on अच्छी बातें, अच्छा ब्लोग: मैनें कुछ नहीं छोडा है तुम्हारे लिये।देवेश वशिष्ठ ' खबरी 'http://www.blogger.com/profile/03089045465753357873noreply@blogger.comBlogger13125tag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-25672697572764349812007-06-07T19:18:00.000+05:302007-06-07T19:18:00.000+05:30देवेश भैया आप बहुत अच्छा लिखते है और कविता सुनाते ...देवेश भैया आप बहुत अच्छा लिखते है और कविता सुनाते भी बहुत अच्छा है...<BR/><BR/>अक्षयakshayhttp://www.blogger.com/profile/01016471278259100558noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-54201163520916864692007-06-07T19:15:00.000+05:302007-06-07T19:15:00.000+05:30आपकी कविता बेहद अच्छी है और प्रेरणादायक है...आदित्...आपकी कविता बेहद अच्छी है और प्रेरणादायक है...<BR/><BR/>आदित्यadityahttp://www.blogger.com/profile/06685608912601420715noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-23659840378731174612007-06-06T14:13:00.000+05:302007-06-06T14:13:00.000+05:30mana ko chhu lenevaali kavita.mana ko chhu lenevaali kavita.swapnahttp://www.blogger.com/profile/09328053643281927035noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-71688120320358189912007-06-06T11:42:00.000+05:302007-06-06T11:42:00.000+05:30sir bahut acha likhte ho, gajab hai.sir bahut acha likhte ho, gajab hai.bippihttp://www.blogger.com/profile/03700964022362554228noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-72551366999437508892007-06-05T22:59:00.000+05:302007-06-05T22:59:00.000+05:30बहुत अच्छी कविता, सच से सराबोर ।घुघूती बासूतीबहुत अच्छी कविता, सच से सराबोर ।<BR/>घुघूती बासूतीMired Miragehttp://www.blogger.com/profile/06098260346298529829noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-59216530317625098012007-06-05T17:40:00.000+05:302007-06-05T17:40:00.000+05:30हर चीज मिलेगी।रूस की क्रांति की तरह,जब मर जायेगी आ...हर चीज मिलेगी।<BR/>रूस की क्रांति की तरह,<BR/>जब मर जायेगी आधे से ज्यादा आबादी<BR/>महान होकर...क्रांति के नाम पर।<BR/>फिर सब मरघट आबाद हो जाऐंगें।<BR/><BR/>मुझे याद करोगे तो याद आयेगी<BR/>मेरी जात... मेरी औकात...17%,... 27%....<BR/>या फिर मुझे सामान्य करार देना।<BR/>मेरी हर तलवार का हिसाब लेना।<BR/>फिर गालियाँ देना मुझे,<BR/>थूकना मेरे चित्र पर,<BR/>दशहरे पर जलाना मेरा पुतला।<BR/>पर जला देना सारी नफरत, मेरे साथ।<BR/>कुछ मत रखना संजोकर विरासत में,<BR/>क्योंकि मैनें कुछ नहीं छोडा है तुम्हारे लिये।<BR/><BR/>देवेश इसे कहते हैं कविता, जो समीक्षा के लिये नहीं है, केवल महसूस करने के लिये है.....तुमने बेहद संवेदित कर दिया।<BR/><BR/>*** राजीव रंजन प्रसादराजीव रंजन प्रसादhttp://www.blogger.com/profile/17408893442948645899noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-49564385238106385342007-06-05T17:37:00.000+05:302007-06-05T17:37:00.000+05:30देवेश तुम्हारा लेखन बहुत सशक्त है तुम्हारी कविता ज...देवेश तुम्हारा लेखन बहुत सशक्त है तुम्हारी कविता जिस भी विशय को लेकर हो दिल को छू लेने वाली होती हो...वो चाहे बचपन की यादें हो या सावन की पहली बारीश जैसे रोमांटिक या फ़िर देश की बिगडी़ हालत पर..बहुत-बहुत बधाई...बहुत सुन्दर झकझोर कर रख देती है तुम्हरी ये कविता...<BR/><BR/>शायद तुम्हारी आवाज सैंकडो लोगो के दिल को समझा पाये और हमारे प्यारे देश को बचा पाये...मेरी शुभकामनाएँ...<BR/><BR/>सुनीता(शानू)sunita (shanoo)http://www.blogger.com/profile/11804088581552763781noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-91900662481616021952007-06-05T17:30:00.000+05:302007-06-05T17:30:00.000+05:30devesh ji bahut badhiya aap ki baat mere dil tak c...devesh ji bahut badhiya aap ki baat mere dil tak choo gayi or mere jazbaton ko jhakjor diyaumashankarhttp://www.blogger.com/profile/17078077342415961847noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-55693163197387647422007-06-05T17:28:00.000+05:302007-06-05T17:28:00.000+05:30अाप इतने कम समय में इतनी अचछी रचानएे कैसे िलख लेते...अाप इतने कम समय में इतनी अचछी रचानएे कैसे िलख लेते है रचानाकार का मैन उदेषय जाे है अाप ने अचछे 'दाे मे ॉयकत fकया हैRAKESHhttp://www.blogger.com/profile/05461256149422744206noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-67196322013971117032007-06-05T16:22:00.000+05:302007-06-05T16:22:00.000+05:30रचना का उद्देश्य पाठक के मन को झकझोरना होता है जो ...रचना का उद्देश्य पाठक के मन को झकझोरना होता है जो आप की रचना बखुबी कर रही है , आज हर कोई आंदोलन करने मे व्यस्थ है और सारा देश सुलगा रहे है अपने स्वार्थ के लिये , शायद आप की रचना कुछ ज्ञान दे पाये इन पागलो को |ऋषिकेश खोङके "रुह"http://www.blogger.com/profile/02023640875553892135noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-86326092115943578702007-06-05T16:19:00.000+05:302007-06-05T16:19:00.000+05:30धन्यवाद देवेश जी , झकझोंड. डाला आपकी इस रचना ने...धन्यवाद देवेश जी ,<BR/> झकझोंड. डाला आपकी इस रचना ने ....।<BR/>स्थितिजन्य भावों का इस नंगे सौंदर्य के साथ चित्रण ..... वीभत्स तो लगती है , पर घृणा नही पैदा करती ..... हाँ , कुछ सोंचने पर जरूर विवश करती है । <BR/><BR/> पर आप कभी तो काफी-हाउस के बुद्धिजीवियों की तरह चुस्कियों में निर्विकल्पता का मजा लेते दिख रहें हैं , तो कभी अपने पुराने दार्शनिकों के नैराश्य की लकीर पर चलते नजर आ रहे हैं ।<BR/> फिर भी नई पौध को आपका संदेश अच्छा लगा - <BR/> <BR/>"पर तुम्हें नई दुनिया बनानी है।<BR/>जहाँ सब इंसान रहना,<BR/>तब मुझे याद मत करना मेरे बेटे।<BR/>भुला देना मेरी हर बात,<BR/>याद,<BR/>इतिहास,"<BR/><BR/>श्रवणsifarhttp://www.blogger.com/profile/12371614532787979718noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-53961940807882083302007-06-05T15:54:00.000+05:302007-06-05T15:54:00.000+05:30"क्योकि मैने कुछ नही छोडा है तुम्हारे लिये॰॰॰॰॰॰॰"..."क्योकि मैने कुछ नही छोडा है तुम्हारे लिये॰॰॰॰॰॰॰"<BR/><BR/>प्रतिशत मे बातें करते हुये आप बहुत कुछ कह गये ।<BR/>मैं तो सिर्फ राजस्थान की बात कर रहा था, समग्र हिन्दुस्तान को कहीं पीछे, बहुत पीछे भूल गया॰॰॰ बौडम जो ठहरा ।<BR/>आपने जो शब्द कहे , वो सही मायनो में "आज के हिन्दुस्तानी" का बखान करते है॰॰॰वो ,जो अपने बच्चों के लिये सिर्फ नफरत छोड कर जाना चाहते है ।<BR/>झकझोरती रचना के लिये साधुवाद ।आर्य मनुhttp://www.blogger.com/profile/14569110609435490290noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-45876174579947001382007-06-05T15:19:00.000+05:302007-06-05T15:19:00.000+05:30बहुत बढिया देवेश जी। आपकी रचना ने मुझे झकझोरकर रख ...बहुत बढिया देवेश जी। आपकी रचना ने मुझे झकझोरकर रख दिया है। <BR/><BR/>मुझे याद करोगे तो याद आयेगी<BR/>मेरी जात... मेरी औकात...17%,... 27%....<BR/>या फिर मुझे सामान्य करार देना।<BR/>मेरी हर तलवार का हिसाब लेना।<BR/>फिर गालियाँ देना मुझे,<BR/>थूकना मेरे चित्र पर,<BR/>दशहरे पर जलाना मेरा पुतला।<BR/>पर जला देना सारी नफरत, मेरे साथ।<BR/>कुछ मत रखना संजोकर विरासत में,<BR/>क्योंकि मैनें कुछ नहीं छोडा है तुम्हारे लिये।<BR/><BR/><BR/>क्या कहूँ। मुझे शब्द नहीं मिल रहे हैं।<BR/>एक मर्मस्पर्शी रचना के लिए बधाई स्वीकारें।tanha kavihttp://www.blogger.com/profile/10276082553907088514noreply@blogger.com