tag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post563614508594477996..comments2007-06-26T17:13:32.899+05:30Comments on अच्छी बातें, अच्छा ब्लोग: फिर उठा,लडखडाया,उड़ गया।देवेश वशिष्ठ ' खबरी 'http://www.blogger.com/profile/03089045465753357873noreply@blogger.comBlogger1125tag:blogger.com,1999:blog-7846541619202827516.post-67331743706508293012007-06-26T17:13:00.000+05:302007-06-26T17:13:00.000+05:30देवेश सचमुच तुम्हारे विचार सटिक और उत्तम है कितनी ...देवेश सचमुच तुम्हारे विचार सटिक और उत्तम है कितनी खूबसूरती से तुमने परिन्दे की व्यथा व्यक्त की है...<BR/><BR/>आसमान ने धक्का मारा,<BR/>धरती ने जंजीर डाल दी।<BR/>पखेरू भी उड़ गये साथ के।<BR/>पंछी नवेला,<BR/>बैठा अकेला।<BR/>गुमसुम,<BR/>चुपचाप,<BR/>पसीना,<BR/>घुटन,<BR/>कांप<BR/>सारी रात रोया,<BR/>चिल्लाया,<BR/>डरा,<BR/>म्यांउ की हर घुडकी पर<BR/>कई कई बार मरा। <BR/>पैरों में खो गया<BR/>पागल सा हो गया।<BR/>जंजीर बहुत गर्म हो गई,<BR/>जलाने लगी,<BR/>प्यास लगी,<BR/>भूख कलेजे तक आने लगी,<BR/>सब उम्मीद मिट गईं,<BR/>सब अरमान खो गए।<BR/>सारे सपने जैसे नींद में सो गए।<BR/>उसे आकाश नहीं मिला<BR/>और धरती भी नहीं बची<BR/>कुछ बोने को,<BR/>पर अब क्या बचा था<BR/>खोने को?<BR/>मगर फ़िर भी विश्वास हृदय में ले फ़िर उड़ा अबकी बार उड़ ही गया...<BR/><BR/>सुनीता(शानू)sunita (shanoo)http://www.blogger.com/profile/11804088581552763781noreply@blogger.com